14 जुलाई को श्रीहरिकोटा से ISRO ने चंद्रयान -3 को लॉन्च किया था और रविवार 6 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे भारत को कामयाबी मिली है जो देश के लिए काफी खुशी और गौरवान्वित वाला पल है चंद्रमा की कक्षा में चंद्रयान-3 की शानदार एंट्री 6 अगस्त की रात हुई और इसरो ने इसका वीडियो भी शोयर किया है।
चंद्रयान ने चंद्रमा का चक्कर काटते हुए फिर से अपने ऑर्बिट को बदल लिया है। इसरो ने कहा है कि इसने चंद्रमा की कक्षा के अंदर चंद्रयान-3 को उसके और नजदीक पहुंचाने की कवायद सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इसरो ने ट्विट कर जानकारी दी कि अब चंद्रयान 3 चांद के और करीब है। अब वह चांद की उस कक्षा में है जो पृथ्वी के इस उपग्रह की सतह के सबसे नजदीक होने पर 170 किलोमीटर और सबसे दूर होने पर 4313 किलोमीटर की दूरी पर होगा। अब 9 अगस्त को देर रात 1 बजे से 2 बजे के बीच दूसरी प्रक्रिया होगी।
चंद्रयान-3 के सफर का पूरा शेड्यल
9 अगस्त : दोपहर पौने दो बजे करीब इसके ऑर्बिट को बदलकर 4 से 5 हजार किलोमीटर की ऑर्बिट में डाला जाएगा।
14 अगस्त : इसे घटाकर 1000 किलोमीटर किया जाएगा। पांचवें ऑर्बिट मैन्यूवर में इसे 100 किलोमीटर की कक्षा में डाला जाएगा।
17 अगस्त : प्रॉपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग होंगे।
18 व 20 अगस्त : डीऑर्बिटिंग होगी। यानी चांद के ऑर्बिट की दूरी को कम किया जाएगा। लैंडर मॉड्यूल 100 x 35 KM के ऑर्बिट में जाएगा।
23 अगस्त 2023: शाम पांच बजकर 47 मिनट पर चंद्रयान की लैंडिंग करवाई जाएगी।इस बार वो गलती नहीं होगी, जो पिछली बार थी।

