2024 लोकसभा चुनाव को लेकर देश भर की सभी पार्टियां ज़ोरो शोरो से तैयारियों में जुटी हुई है। अभी कुछ ही समय पहले तक जहां पार्टियां अकेले ताल ठोक रही थी लेकिन अब सभी विपक्षी पार्टियां एक होकर भाजपा को हराने की जी तोड़ कोशिश कर रही हैं। फ़िलहाल हालात यह हैं की देश में राजनीति काफी गर्म है। विपक्ष झुण्ड बनाकर भाजपा के खिलाफ एक के बाद एक वार करने में लगी हुई है तो बीजेपी भी इस मामले में कुछ कम नहीं हैं।
दरअसल, विपक्षी मोर्चा INDIA की ओर से जारी सियासी हमले पर डिफेंसिव मोड में जाने की बजाय बीजेपी लगातार पलटवार की रणनीति अपना रही है। बता दें कि 26 दलों के विपक्षी गठबंधन का बीजेपी से करीब 450 सीटों पर सीधा मुकाबला होने के आसार है। इनमें ग्रामीण इलाकों की 250 से अधिक सीटें है। जिसके चलते बीजेपी इसी हिसाब से मुद्दे तय करने में जुटी है।
बीजेपी की रणनीति और पार्टी की चिंता…
दरअसल, चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण नैरेटिव सेट करना होता है। जिसकी कमान खुद प्रधानमंत्री मोदी ने संभाल ली है। बता दें कि 2 जुलाई से लेकर अब तक प्रधानमंत्री ने विपक्षी गठबंधन पर कम से कम 8 बार अटैक कर चुके हैं और इस दौरान उनहोंने विपक्षी गठबंधन को भ्रष्टाचारियों का अड्डा तक बता दिया है।
पीएम मोदी ने कहा कि पीएफआई, इंडियन मुजाहिद्दीन और सिमी जैसे आतंकी संगठनों के नामों में भी इंडिया जुड़ा है। हालांकि राजनीतिक जानकार प्रधानमंत्री के इस बयान को ध्रुवीकरण के नजरिए से देख रहे हैं। बता दें विपक्षी मोर्चे पर प्रहार के साथ-साथ प्रधानमंत्री 2024 का सियासी पिच भी तैयार कर रहे हैं।
विपक्षी एकता को बीजेपी इतनी गंभीरता से क्यों ले रही हैं ?
इसके दो कारण है :-
पहला, दरअसल 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन ने अटल सरकार को पटखनी दे दी थी। उस वक्त अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में बीजेपी इंडिया शाइनिंग के रथ पर सवार थी। कई सर्वे में भी उस वक्त बीजेपी को आगे बताया गया था, लेकिन सोनिया गांधी के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने बीजेपी को हरा दिया।
हार के बाद बीजेपी ने समीक्षा की तो पाया कि क्षेत्रीय दलों को नजरअंदाज करना बड़ी गलती थी। बीजेपी के विकास के ओवर कॉन्फिडेंस में इंडिया शाइनिंग का रथ डूब गया। जिसके चलते पार्टी इस बार यह गलती कतई नहीं करना चाहती है।
दूसरा, चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में लोकसभा की कुल 353 सीटें हैं। अगर 2019 को छोड़ दिया जाए तो ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियां ही मजबूत रही है। विपक्षी मोर्चे में जिन 26 पार्टियों ने एक साथ आने की बात कही है, उनका वोट प्रतिशत 2019 में करीब 45 प्रतिशत था तो दूसरी और गठबंधन में शामिल पार्टियां देश के ग्रामीण इलाकों में काफी मजबूत स्थिति में है।

