आज बॉलीवुड के शंहशाह इंडस्ट्री के लीजेंड एक्टर हैं लेकिन अमिताभ को अमिताभ बच्चन बनाने वाले महान फिल्मकार प्रकाश मेहरा का जन्म बिजनौर के मोहल्ला खत्रियान में 13 जुलाई 1939 को हुआ था। प्रकाश मेहरा के पिता कैलाशनाथ मेहरा सर्राफा की दुकान चलाते थे। दुकान में घाटा आने के कारण उनके पिता को दुकान बंद करनी पड़ गई थी। पिता के अलावा नाना छैल बिहारी लाल खन्ना, उनके पुत्रों रमेश और कामेश खन्ना आदि परिजनों की छत्रछाया में प्रकाश मेहरा का बचपन बीता।
प्रकाश मेहरा की माता का निधन उनके बचपन में ही हो गया था। बिजनौर नगर के खत्रियान मोहल्ले में मेहरा जी की हवेली आज भी मौजूद है। जिसमे उनकी रिश्तेदार श्री सांई प्ले स्कूल चलाती है। प्रकाश मेहरा हिन्दी फ़िल्मों के निर्माता एवं निर्देशक थे। मेहरा ने 50 के दशक में अपने फ़िल्मी जीवन की शुरूआत एक प्रोडक्शन कंट्रोलर की हैसियत से की थी।
1968 में उन्होंने शशि कपूर की फ़िल्म हसीना मान जायेगी का निर्देशन किया। जिसमें शशि कपूर ने दोहरी भूमिका निभाई थी। इसके बाद 1971 में उन्होंने मेला का निर्देशन किया। जिसमें फिरोज खान और संजय खान ने मुख्य भूमिका निभाई थी। 1973 में उन्होंने जंजीर का निर्माण और निर्देशन किया। यह फ़िल्म जबरदस्त हिट रही और इस फ़िल्म ने अमिताभ के डवांडोल कैरियर को पटरी पर ला दिया। इस फ़िल्म से अमिताभ के साथ प्रकाश मेहरा का रिश्ता गहरा हो गया और दोनों ने लगातार सात सुपरहिट फ़िल्में थी। फ़िल्म जादूगर में उनका तिलिस्म टूटता हुआ नजर आया। प्रकाश मेहरा ने बाद में जिंदगी एक जुआ फ़िल्म बनाई। अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित जैसे स्टारों के बावजूद यह फ़िल्म कमाल नहीं दिखा पाई. 1996 में उन्होंने राजकुमार के बेटे पुरू राजकुमार को फ़िल्म ब्रह्मचारी के जरिए फ़िल्मी परदे पर लाया, लेकिन यह फ़िल्म भी असफल रही। यह उनके निर्देशन की आखिरी फ़िल्म थी। बाद में उन्होंने दलाल फ़िल्म का निर्माण किया। जो एक सफल फ़िल्म साबित हुई।
इंडिया मोशन पिक्चर्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन ने 2006 में उन्होंने लाइफ टाइम्स अवार्ड से सम्मानित किया। 2008 में इसी संस्था ने उन्हें प्रोडूसर से रूप में लाइफ टाइम अवार्ड से सम्मानित किया। प्रकाश मेहरा बॉलीवुड के प्रथम निर्देशकों में से थे जिन्होंने हॉलीवुड में भी हाथ आजमाया, लेकिन भारी बजट के कारण उनका प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सका। 17 मई 2009 को निमोनिया और दूसरी बीमारियों के कारण मुंबई में उनकी मृत्यु हो गई। उनके तीन पुत्र है। पुनीत, सुमित और अमित मेहरा।
प्रकाश मेहरा के ममेरे भाई विपिन मेहरा बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान ही प्रकाश मेहरा घर से 4 रुपये लेकर निकल गए था। साहित्यकार अशोक मधुप बताते है कि झालू कस्बे के पुराने मालदार करन सिंह राणा प्रकाश मेहरा के बेहद करीबी दोस्त थे। उन्होंने ने ही प्रकाश मेहरा को मुंबई ले जाकर रहने और खाने पीने का इंतजाम कराया था।
आखिरी बार 1988 में मोहल्ला खत्रियान के मकान में आए थे प्रकाश मेहरा मोहल्ला खत्रियान में जिस मकान में प्रकाश मेहरा जन्मे, वह आज भी है। उनके ममेरे भाई विपिन मेहरा बताते हैं कि प्रकाश कई बार बिजनौर आए। आखिरी बार 1988 में यहां आना हुआ। अपने बिजनौर आगमन के समय वह एक बार एक शादी समारोह में भी शामिल हुए थे। यह फोटो आज भी उनके पास है। मामा से ही करा दिया था विलेन का रोल प्रकाश मेहरा समय के पाबंद थे। मुंबई में फिल्म ‘खून पसीना’ की शूटिंग के वक्त विलेन की भूमिका निभाने वाला कलाकार समय पर नहीं पहुंचा। उसी दौरान प्रकाश मेहरा के मामा उनके पास मुंबई गए हुए थे। प्रकाश ने मामा को ही विलेन का गेटअप देकर शूटिंग कर ली थी। उन्होंने फिल्म ‘घुंघरू’के एक गीत की शूटिंग बिजनौर बैराज स्थित ‘शीशमहल’ में की थी। 17 मई 2009 को मुंबई में प्रकाश मेहरा का देहांत हो गया था।

