लोकसभा चुनाव 2024 का बिगुल बज गया है। इसको लेकर सभी पार्टियां ज़ोरो शोरो से तैयारियां भी कर रही है और एक दूसरे को पछाड़ने का प्लान भी बना रही है। धीरे – धीरे देश भी लोकसभा चुनाव के रंग में रंगने लगा है। सभी विपक्षी दल एकजुट होकर सत्ताधारी भाजपा को हराने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। बता दें की तमाम विपक्षी दल फ़िलहाल बेंगलुरु में दो दिन यानी 17 और 18 जुलाई को एकजुट हो भाजपा को घेरने की तैयारी कर रही है लेकिन भाजपा भी विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए आज नई दिल्ली में NDA की शक्ति प्रदर्शन करने जा रही है।
बहरहाल, सियासत में आज शक्ति प्रदर्शन का दिन है। एक तरफ जहां कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में विपक्षी दलों की बैठक हो रही हैं जिसमें करीब दो दर्जन पार्टियों के नेता हिस्सा ले रही है तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बैठक बुलाई है। बता दें बीजेपी ने इस बैठक के लिए करीब तीन दर्जन पार्टियों के नेताओं को आमंत्रित किया है।
भाजपा ने गठबंधन की चाल चलकर बदल डाले सभी समीकरण
बता दें कि बेंगलुरू में बैठक कर रही विपक्षी दलों के बीच एकता की नीव बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पहल पर रखी गई है। इस बार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी साथ आती दिखाई दे रही है। बता दें की पिछली बार की मीटिंग में कुछ भी फाइनल नहीं हुआ था लेकिन बात अगर बीजेपी की करें तो विपक्ष की दूसरी बैठक से पहले बीजेपी ने विभिन्न पार्टियों के साथ गठबंधन कर कई राज्यों के समीकरण ही बदल दिए।
बता दें कि भाजपा ने महाराष्ट्र से रामदास अठावले की पार्टी आरपीआई (ए), एक साल पहले एनडीए में शामिल हुई एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार की नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को आमंत्रित किया है। बिहार से पशुपति पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी), एक दिन पहले ही एनडीए में वापसी करने वाले चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक जनता दल को भी बैठक के लिए न्यौता भेजा गया है।
शक्ति प्रदर्शन के क्या है मायने :-
दरअसल, सत्ता के केंद्र दिल्ली में होने वाली इस बैठक को लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जानकारी देते हुए कहा कि ये बैठक सत्ता पाने के लिए नहीं सेवा करने के लिए हो रही है और आगे बताया की ”एनडीए की 25वीं सालगिरह पर होने वाले इस शक्ति प्रदर्शन में जो 38 पार्टियां शामिल होने जा रही है वह बीते 9 सालों में इस अलाइंस का जो डेवलपमेंट का एजेंडा है, जो स्कीम्स हैं, जो नीतियां हैं, जो पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही हैं, इसमें एनडीए के सभी दलों ने रूचि दिखाई है और तो और एनडीए के प्रति उत्साह के साथ पार्टियां आ रही है।”
बता दें की बीजेपी 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में छोटे-छोटे दलों के साथ होने और न होने का हानि-लाभ देख चुकी है। कांटे के मुकाबले में फंसी सीटों पर इन दलों के 4-4, 5-5 फीसद वोट भी बड़े काम के साबित होते है। बड़ी बात यह है कि इन दलों के वोट अधिक और आसानी से गठबंधन साझीदार को ट्रांसफर भी हो जाते हैं। बीजेपी की छोटी-छोटी पार्टियों को साथ लाने की रणनीति कितना सफल रहती है? यह तो चुनाव नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल, मिशन 2024 की तैयारियों में जुटी बीजेपी एनडीए का कुनबा बढ़ाने और गठबंधन की गांठें दूर करने की कवायद में है।

