इस समय कई प्रदेशों में सब्जी के दाम आसमान छू रहे हैं। सब्जियों के दाम बढ़ने से लोगों की थालियों से हरी सब्जियां धीरे-धीरे गायब हो रही है। लोगों को सब्जियां खरीदने में महंगाई की मार से पसीने छूट रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में बीजेपी विधायक साकेन्द्र वर्मा ने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि सब्जियों के दाम बढ़े हैं वह किसान विरोधी हैं। सब्जियों के दाम बढ़ने से किसानों को लाभकारी मूल्य मिल रहे हैं। इसमें किसानों को खुश होना चाहिए। जो लोग कह रहे हैं सब्जियों के दाम बढ़े हैं वह लोग किसान विरोधी हैं। विधायक ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है यहां 67 परसेंट लोग किसानी करते हैं। वह खुश है जो लोग कह रहे हैं सब्जियों के दाम बढ़े हैं वह राजनीतिक विरोधी हैं उनका यह कहना काम है।
बता दें कि इस साल मॉनसून आने के बाद से सब्जियों के दाम में आग लगी हुई है। देखते ही देखते कुछ ही दिनों में सब्जियों की कीमत 25 से 30 फीसदी तक बढ़ गई है। इससे लोगों के घर का बजट बिगाड़ रहा है। हर घर में सब्जियों की कीमत की ही चर्चा हो रही है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में तो टमाटर 160 से 200 रुपये किलो तक बिक रहा है। हरी मिर्च का दाम 300 रुपये किलो तक पहुंच गया है। अदरक का दाम 300 रुपये के पार पहुंच चुका है। लौकी 60 रुपये और परवल 80 से 100 रुपये तक की ऊंचाई को छू रहा है। आलू और प्याज भी अब अपना रंग दिखाने लगे हैं।
बाराबंकी में कुर्सी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक साकेन्द्र प्रताप वर्मा ने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि सब्जियों के दाम बढ़े हैं वह किसान विरोधी हैं, राजनीतिक विरोधी हैं उनका यह कहना काम है। विधायक ने कहा कि सब्जियों के दाम बढ़ने से किसानों को लाभकारी मूल्य मिल रहे हैं। भारत कृषि प्रधान देश है यहां 67 परसेंट लोग किसानी करते हैं वह खुश है तो किसको परेशानी है। विधायक के बयान पर सवाल यह उठता है कि आप सब्जियों की जो कीमत चुका रहे हैं, क्या वह सारा का सारा पैसा किसान की जेब में जा रहा है। क्या इस बढ़ती महंगाई के लिए किसान जिम्मेदार है, या फिर वो आढ़तियों और व्यापारियों जो ढुलाई से लेकर दुकानदारी तक की लागत जोड़कर इस महंगाई को कई गुना बढ़ा देते है।
दरअसल टमाटर, प्याज और आलू इन सब्जियों में से यदि किसी का भी दाम बढ़ता है तो पूरे देश में हाहाकार मच जाता है। इसकी वजह भी है, क्योंकि इनका इस्तेमाल हर घर में होता है। इस बार प्याज और आलू का दाम भले ही काबू में हो, लेकिन टमाटर का रेट आसमान पर पहुंच गया है। लेकिन आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि जिस फसल को किसान महीनों की मेहनत से तैयार करता है, उसकी उपज की कीमत का फैसला कुछ ही मिनट में आढ़ती और व्यापारी कर देते हैं। इस खेल में कभी-कभी तो किसानों को अपनी उपज फेंकने पर मजबूर होना पड़ता है लेकिन अब जब सब्जियों की कीमत आसमान पर पहुंच गई है, तो किसानों के हिस्से में क्या आ रहा है इसका तो पता नहीं, लेकिन बाराबंकी में बीजेपी विधायक साकेन्द्र प्रताप वर्मा ने इसका सीधा फायदा किसान को बताया है। उन्होंने बताया है कि सब्जियों के दाम बढ़ने से किसानों को लाभकारी मूल्य मिल रहे हैं। भारत कृषि प्रधान देश है यहां 67 परसेंट लोग किसानी करते हैं वह खुश है तो किसको परेशानी है। जो लोग कह रहे हैं सब्जियों के दाम बढ़े हैं वह किसान विरोधी हैं,राजनीतिक विरोधी हैं।

