आगामी लोकसभा चुनाव दिन प्रति दिन खासा दिलचस्प होता जा रहा है। जहां एक ओर विपक्षी दल एकजुट होकर भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने की कोशिश में जुटी हुई है तो वही दूसरी ओर भाजपा भी विपक्षी दलों को यह संकेत देना शुरू कर दी है कि इस बार का चुनाव आसान नहीं होने वाला है चाहे कितना भी विपक्ष एक हो जाए। भाजपा भी अब अपने एनडीए का कुनबा बढ़ाने पर ध्यान दे रहे है। अगर विपक्ष डाल डाल चल रही है तो भाजपा भी पात पात चल रही है। जहां विपक्ष देशभर से लगभग 2 दर्जन पार्टियों को भाजपा के खिलाफ लामबंद कर लिया है तो वही भाजपा भी 38 पार्टियों को अपने साथ कर लिया है। भाजपा यह चुनाव किसी भी हल में हल्के में नहीं लेना चाहती है।
बता दें कि मंगलवार का दिन भारतीय राजनीति में खासा अहम होने वाला है। अगले साल संभावित लोकसभा चुनावों के लिहाज से एक सीधी विभाजित रेखा खींचे जाने की कोशिशें शायद मंगलवार जमीनी स्तर पर दिखने लगें। मंगलवार को जहां बेंगलुरू में कांग्रेस के बुलावे पर हो रही बैठक में करीब 26 दलों के नेता शामिल होने वाले हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी दिल्ली के अशोका होटल में अपने सहयोगी दलों के साथ बैठक करने जा रही है ।
बैठक में 38 दलों के नेता शामिल होंगे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक में 38 दलों के नेता शामिल होंगे। हालांकि भी इन दोनों गठबंधनों को सीधे तौर कोई स्वरूप नहीं मिला है, पर पुराने प्रयोग के आधार पर इसे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी राजग या एनडीए कहा जाने लगा है। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को अभी से संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी संप्रग या यूपीए का नाम दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि मंगलवार को कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दलों की बैठक बेंगलुरु में हो रही है । विपक्ष की इस बैठक में इस बार सोनिया गांधी भी शामिल हों रही है। इस बार की विपक्षी बैठक में 8 नए दल भी शामिल हो रहे है। जिसमें जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी भी शामिल है। इससे पहले पटना में हुई बैठक में सिर्फ 17 दल शामिल हुए थे। सोनिया गांधी बैठक से पहले आज (सोमवार) को सभी विपक्षी पार्टियों के लिए रात्रि भोज का भी आयोजन कर रही है।

