सुप्रीम कोर्ट जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर अब दो अगस्त को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने कहा कि हम सिर्फ संवैधानिक मामलों पर ही सुनवाई करेंगे।
आज वरिष्ठ वकील राजू रामचद्रंन ने बताया कि दो याचिकाकर्ता शाह फैसल और शेहला राशिद अपनी याचिका वापस ले चुके हैं। इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि इन दोनों के नाम लिस्ट से हटा दिए जाएं। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि रि आर्टिकल 370 ((Re Article 370) के नाम से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा। केंद्र सरकार ने साफ किया कि अनुच्छेद 370 लागू होने के बाद जम्मू-कश्मीर के बदले हालात को लेकर सरकार ने जवाब ज़रूर दाखिल किया है लेकिन इसको केस से जुड़े संवैधानिक सवालों के खिलाफ दलील के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर अंकुश लगाने के लिए ही अनुच्छेद 370 को हटाया गया था, क्योंकि तीन दशक से आतंकवाद झेल रहा था। 2018 में पत्थरबाजी की 1767 घटनाएं हुईं। उसके बाद अब तक पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं हुई। बंद और हड़ताल की 52 घटनाएं 2018 में हुईं और उसके बाद से कोई भी बंद और हड़ताल की घटना रिपोर्ट नहीं की गई। केंद्र ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 निरस्त करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि इस कदम से जम्मू-कश्मीर के लोग शांति, समृद्धि और स्थिरता के साथ जीने के साथ अब पर्याप्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।

