पीएम मोदी ने रविवार 18 जून को अपनी मन की बात कही हालांकि बता दें हर बार प्रधानमंत्री महीने के आखिरी रविवार को करते हैं लेकिन इस बार एक हफ्ते पहले ही उन्होंने अपना कार्यक्रम किया। पीएम अपनी मन की बात शुरूआत में कहा मैं हर बार महीने के आखिरी रविवार को करता हूं लेकिन मैं अगले हफ्ते अमेरिका में रहूंगा और वहां कार्यक्रम काफी व्यस्त होने वाला है, तो मैंने सोचा कि मैं जाने से पहले आपसे बात कर लूं। आप सभी देशवासियों से बात करने से बेहतर और क्या हो सकता है।
पीएम मोदी ने मन की बात में तूफान बिपरजॉय का भी जिक्र करते हुए कहा कि अभी दो दिन पहले आए चक्रवाती तूफान बिपरजॉय ने गुजरात में जो भारी तांडव मचाया, तबाही मचाआ लेकिन हमने पहले ही काफी हद तक लोंगो को सावधान कर के सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और गुजरातवासियों ने भी साहस के साथ तूफान का सामना किया वह काफी अभूतपूर्व है।
तूफान के जिक्र के बाद प्रधानमंत्री ने टीबी बीमारी के बारे में मन की बात करते हुए कहा कि पहले जब लोंगो को पता लगता था कि परिवार में किसी को ये बीमारी है तो अपने ही लोग उससे दूर हो जाते थे लेकिन समय में बदलाव हुआ और आज टीबी मरीज को परिवार का सदस्य बनाकर उसकी मदद की जा रही है।
पीएम के 102वीं मन की बात को यूपी के रामपुर में भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं ने सुना इसके साथ मुस्लिम महिलाएं भी प्रधानमंत्री की बात सुनती हुई नजर आईं। जल संरक्षण को लेकर भी प्रधानमंत्री ने संदेश दिया, साथ ही छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता के साथ ही उनकी प्रशासनिक क्षमता की भी तारीफ की। खासकर जल प्रबंधन और नौसेना को लेकर शिवाजी महाराज ने ऐतिहासिक काम किए, उनके बनाए जलदुर्ग आज भी समंदर के बीच शान से खड़े हैं। शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक को 350 वर्ष पूरे हुए हैं, जिसे एक बड़े पर्व के रूप में मनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। हम अपने लोकतांत्रिक आदर्शों को सर्वोपरि मानते हैं, अपने संविधान को सर्वोपरि मानते हैं। 25 जून को हम कभी नहीं भूल सकते, जब देश पर इमरजेंसी थोपी गई थी। वह भारत के इतिहास का काला दौर था। पीएम मोदी ने कहा कि उस दौरान कई किताबें लिखी गईं, मैंने भी उस दौर पर ‘संघर्ष में गुजरात’ नाम से एक किताब लिखी है। टॉर्चर ऑफ पॉलिटिकल प्रिजनर्स इन इंडिया नामक किताब में उस दौर में लोकतंत्र के रखवालों से क्रूरतम व्यवहार कर रही थी।

