गाजियाबाद पुलिस की कस्टडी में दिलशाद की मौत हो गई है। इस मामले में पुलिसकर्मी पर हत्या (IPC-302) की FIR हुई, विभागीय जांच भी शुरू। कुछ देर में सस्पेंशन की कार्रवाई होगी।,
क्या था पूरा मामला
गाजियाबाद का दिलशाद कपड़े ड्राईक्लीन करता था। कल विजयनगर पुलिस ने उसे एक महिला संबंधित केस में कस्टडी में लिया था। कई घंटे बाद फैमिली को पता चला कि उसकी लाश पोस्टमार्टम हाउस पर पड़ी है।
पुलिस की थ्योरी है कि दिलशाद को हिरासत में लेकर कार से थाने पर लाया जा रहा था उसने थूकने के लिए सिर बाहर निकाला तो साइड से कैंटर ने टक्कर मारी और उसकी मौत हो गई। कैंटर पर निशान नहीं हैं। कार की खिड़की मामूली रूप से डैमेज है। कोई पुलिसकर्मी चोटिल नहीं है। शरीर पर पिटाई जैसे निशान हैं। इसलिए फैमिली को कस्टडी डेथ का शक है।
दिलशाद के परिवारजनों का कहना है कि दिलशाद अपने घर से नीति खंड चौकी इंचार्ज के फोन आने पर उसके कपड़े ड्राई क्लीन करके देने गया था जहां से वह सीधा मौत के मुंह में चला गया हालांकि पुलिस ने 4 घंटे तक दिलशाद के परिवार को कुछ नहीं बताया जिसके बाद दिलशाद के परिवारजनों ने थाने पर आकर कड़ाई से पूछताछ की तो बताया गया कि आपका बेटा चलती गाड़ी में से कूद गया था जिससे उसके सर में चोट लगी है और वह आईसीयू में भर्ती है लेकिन दिलशाद की लाश पोस्टमार्टम हाउस में पड़ी थी।
इसी बात पर दिलशाद के परिवार जनों का आरोप है कि उस गाड़ी जो कि पुलिस द्वारा बताई गई है उसमें कोई भी खून के निशान नहीं है और उस ट्रक में भी इतनी कोई खरोंच नहीं है जिससे किसी की मौत हो सके परिवार जनों का विजय नगर पुलिस और नीति खंड चौकी इंचार्ज पर दिलशाद को मारने का आरोप लगाया जा रहा है ऐसे में प्रतीत होता है कि आला अधिकारियों की चुप्पी से किसी हद तक पुलिस कस्टडी में दिलशाद की मौत हुई हो उस मौत को छुपाने के लिए एक्सीडेंट का नाम दिया जा रहा है हालांकि दिलशाद के परिवारजनों का कहना है कि जिस ट्रक ड्राइवर को पुलिस ने कस्टडी में ले रखा है जब परिवारजनों ने उनसे पूछा तो उन्होंने किसी भी एक्सीडेंट का होने का इनकार किया अब दिलशाद की मौत हादसा है या मर्डर इसके बारे में जांच करने के बाद ही पता चलेगा लेकिन एक परिवार का भरण पोषण करने वाला चिराग बुझ गया है।

