माध्यमिक स्कूलों में बच्चों के बौद्धिक विकास, सामान्य ज्ञान और आत्मबल बढ़ाने के लिए डीआईओएस अपने नवाचार मिशन पहचान से बदलाव ला रहे हैं। प्रार्थना सभा में देश-दुनिया की खबरों के प्रस्तुतीकरण के साथ बच्चे हर शनिवार को स्कूल में फन-डे मना रहे हैं। साथ ही स्कूल में बच्चे नोटिस बोर्ड पर प्रतिदिन अपना विचार अंकित कर रहे है। इसका उद्देश्य बच्चों को किताबी और रटने वाले ज्ञान से इतर नवाचार के माध्यम से सामान्य ज्ञान और आत्मबल बढ़ाना है। साथ ही बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर अपने जनपद सहित प्रदेश का नाम रोशन कर सकें, इसके लिए इस बार दूसरे साल मिशन पहचान परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा का मूल उद्देश्य बच्चों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति उत्साह को बढ़ाना और बच्चे का ज्ञान-गुरु की पहचान है।
दरअसल डीआईओएस ओपी. त्रिपाठी का राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नवाचार ‘मिशन पहचान’ बच्चों को शिक्षित करने के साथ-साथ उनका चौमुखी विकास भी कर रहा है। इसी पहल के तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग के बच्चों का बौद्धिक स्तर जांचने के लिए उत्सव के रूप में आज 73 केंद्रों पर मिशन पहचान परीक्षा आयोजित की गई। दो पालियों में हुई इस परीक्षा में 38 राजकीय और 35 अशासकीय सहायता प्राप्त यानी कुल 73 स्कूलों के छठवीं से 12वीं तक के करीब 40 हजार विद्यार्थी शामिल हुए। इस परीक्षा को लेकर बच्चों के साथ शिक्षकों में गजब को उत्साह देखने को मिला। परीक्षा कराने को लेकर अधिकारियों को ब्लॉकवार जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिनकी देखरेख में परीक्षा संपन्न कराई गई।
आपको बता दें कि बाराबंकी जिले में करीब तीन माह पहले ही आये डीआईओएस ओ.पी. त्रिपाठी ने अपने नवाचार मिशन पहचान की शुरूआत कराई है। इसमें राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त स्कूल के बच्चों व शिक्षकों में काफी रुचि भी दिख रही है। इस दौरान बच्चों ने क्या सीखा, इसके मूल्यांकन को लेकर इस मिशन पहचान परीक्षा का आयोजन किया गया। प्रश्न पत्र में 50 बहु विकल्प प्रश्न थे। जिसमें चार विकल्प में एक सही उत्तर था। मिशन पहचान परीक्षा में जो बच्चे बेहतर प्रदर्शन करके दिखाएंगे। उन्हें विभाग सम्मानित करेगा।
वीओ- बाराबंकी के डीआईओएस ओपी. त्रिपाठी ने बताया कि यह परीक्षा पूरी तरह से बोर्ड परीक्षा की तरह आयोजित की गई। सभी बच्चों को अलग-अलग कक्षाओं में बैठाया गया और सीसीटीवी कैमरे से परीक्षा की रिकॉर्डिंग कराई गई। जिसकी मॉनिटरिंग स्वयं जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में लगे सीसीटीवी कंट्रोल सिस्टम से हुई। बच्चों में इस परीक्षा के लिए गजब का उत्साह देखने को मिला है। बाराबंकी के जीजीआईसी की प्रधानाचार्य पूनम सिंह ने बताया कि मिशन पहचान परीक्षा में जो बच्चे बेहतर प्रदर्शन करके दिखाएंगे। उन्हें सम्मानित करने का काम करेगा। साथ ही परीक्षा के बाद जो बच्चे कमजोर पाए जाएंगे उनके लिए अतिरिक्त कक्षा का आयोजन किया जाएगा।

