उत्तर प्रदेश में फिलहाल माफियाओं और गैंगस्टरों की मानो उलटी गिनती शुरू हैं,जिसमे STF एक बहुत ही मुख्य किरदार निभा रही हैं,
दरअसल 4 मई 1998 के दिन उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स यानी यूपी एसटीएफ की स्थापना की गई. जिसका लक्ष्य था कि वह यूपी में माफिया और संगठित अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगी |
STF की सिल्वर जुबली
बीते दिन यानी 4 मई को यूपी एसटीएफ ने अपने 25 साल भी पूरे कर लिए साथ ही एसटीएफ ने यूपी के एक और बड़े गैंगस्टर अनिल दुजाना को भी एनकाउंटर में ढेर दिया. आपको बता दें मेरठ में एसटीएफ और अनिल दुजाना के बीच गोलीबारी हुई और इस दौरान अनिल मारा गया.अनिल दुजाना के ऊपर 65 मामले दर्ज हैं,यूपी एसटीएफ ने अपने 25 सालों के सफर में एक से एक भयंकर अपराधी का सामना किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की और उन्हें एनकाउंटर में ढेर भी किया. श्री प्रकाश शुक्ला जैसे तमाम गैंगस्टर्स का सामना कर आज एसटीएफ अपराधियों में खौफ का नाम बन चुकी है. माना जाता है कि आज यूपी एसटीएफ का खौफ इतना है कि यूपी के बड़े-बड़े माफिया-अपराधी एसटीएफ के डर से जेल को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं |
अभी कितने और माफिया हैं STF की रडार पर
आपको बता दें यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दूसरे कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के 66 माफियाओं को चिन्हित किया गया था. इसमें से एक अनिल दुजाना भी था. इससे पहले माफिया अतीक अहमद और अशरफ की भी हत्या कर दी गई है इतना ही नहीं अतीक के बेटे और उसके शूटर दोस्त गुलाम को भी STF ने एनकाउंटर में ढ़ेर किया था, ऐसे में अब 66 माफियाओं की लिस्ट कम होकर 63 पर आ गई है. अभी पुलिस और एसटीएफ की रडार पर 63 माफिया हैं. इस लिस्ट में शामिल मुख्तार अंसारी, सुनील राठी, सुंदर भाठी, बबलू श्रीवास्तव, खान मुबारक जैसे माफिया जेल में बंद हैं. तो वहीं 20 माफिया ऐसे भी हैं जो फिलहाल जमानत पर बाहर हैं |
कौंन हैं STF की पकड़ से फरार
वंही अगर बात करें तो 5 माफिया ऐसे भी हैं जो पुलिस और एसटीएफ की पकड़ से फरार हैं. इनमें पश्चिमी यूपी का ढाई लाख का इनामी बदमाश बदन सिंह बद्दो, राशिद नसीम का नाम भी शामिल है. इसके साथ ही जो माफिया जमानत पर जेल से बाहर हैं, उनपर भी एसटीएफ और पुलिस सख्त नजर रख रही है. इनमें डॉन बृजेश सिंह और सुशील मूंछ जैसे माफियाओं का नाम शामिल है |

