उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार में माफियों का बुरा दौर चल रहा है। एक के बाद एक लगातार एनकाउंटर हो रहे है। इस साल उमेश पाल हत्याकांड के बाद यूपी एसटीएफ ने कई एनकाउंटर किए है। इन एनकाउंटरों में बड़े बड़े बदमाश और माफिया ढेर हुए है। अभी हाल ही में यूपी एसटीएफ ने माफिया अतीक अहमद के बेटे असद और उसके शूटर गुलाम को झाँसी में मिट्टी में मिला दिया।
बता दें कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में कहा था कि जो भी कानून व्यवस्था को चुनौती देगा उसे मिट्टी में मिला दिया जाएगा। माफिया और दबंगो की इस सफाई में इस बार गौतमबुद्ध नगर के कुख्यात गैंगस्टर अनिल दुजाना पुलिस के हत्थे चढ़ा है। उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने इस कुख्यात गैंगस्टर को मेरठ में हुए मुठभेड़ में मार गिराया है।
बताया यह जा रहा है कि अनिल दुजाना अपने साथियों के साथ एक बड़ी घटना को अंजाम देने जा रहा था। इस बीच मुखबिर ने पुलिस को इस बात की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना देर किए उसे घेर लिया। जब अनिल दुजाना खुद को पुलिस से घिरा पाया तो गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद यूपी एसटीएफ और दुजाना के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। यह मुठभेड़ मेरठ के भोला झाल स्थित गंग नहर के पास हुई। जिसमें दुजाना ढेर हो गया।
62 केस, 75 हजार का इनाम, 2002 मेे किया पहला हत्या, 21 साल बाद हो गया ढ़ेर
गौरतलब है कि अनिल दुजाना गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में आतंक का पर्याय माना जाता था। यह कानून व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा था। उस पर 62 केस दर्ज हैं। कुख्यात अनिल दुजाना पर यूपी समेत अन्य राज्यों में लगभग 50 हत्या, रंगदारी, फिरौती आदि के केस दर्ज हैं। वहीं,यूपी पुलिस ने दुजाना पर 75 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था। बता दें कि करीब एक सप्ताह पहले वो जेल से रिहा हुआ था। जेल से रिहा होते ही उसने गौतमबुद्ध नगर में अपने खिलाफ गवाही दे रहे लोगों को धमकियां देना शुरू कर दिया था। पुलिस को लगातार सूचनाएं प्राप्त हो रही थी। इसके बाद दुजाना को ठिकाने लगा दिया गया।
बता दें कि यूपी के गौतम बुद्ध नगर के बादलपुर का दुजाना गांव कभी कुख्यात सुंदर नागर उर्फ सुंदर डाकू के नाम से जाना जाता था। सत्तर और अस्सी के दशक में सुंदर का दिल्ली-एनसीआर में खौफ था। उसने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक को जान से मारने की धमकी दे दी थी। इसी दुजाना गांव से अनिल नागर उर्फ अनिल दुजाना आता है। पुलिस रिकॉर्ड में 2002 में गाजियाबाद के कवि नगर थाने में इसके खिलाफ हरबीर पहलवान की हत्या का पहला मुकदमा दर्ज हुआ था।

