Firozabad News: फिरोजाबाद जिले में डीएपी और यूरिया खाद की भारी कमी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सरकार द्वारा निर्धारित गाइडलाइंस के तहत एक एकड़ (लगभग 5 बीघा) भूमि के लिए केवल एक बोरी डीएपी और एक बोरी यूरिया ही किसानों को दी जा रही है। यह नीति मिर्च और आलू जैसी अधिक पोषक तत्वों की मांग करने वाली फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है।
टूंडला, सदर और शिकोहाबाद क्षेत्रों में आलू की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, जबकि नारखी और टूंडला ब्लॉक मिर्च उत्पादन के लिए प्रमुख हैं। इन इलाकों में किसान सुबह से शाम तक सरकारी समितियों के बाहर खाद के इंतजार में लंबी कतारों में खड़े रहते हैं, लेकिन उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है।
किसानों का कहना है कि सरकार की मौजूदा खाद वितरण व्यवस्था केवल पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं और धान के लिए उपयुक्त है, लेकिन उद्यानिक फसलों के लिए यह पूरी तरह से असंतुलित है। उनका दावा है कि मिर्च और आलू जैसी फसलों के लिए एक एकड़ में कम से कम चार बोरी खाद की जरूरत होती है। यदि पर्याप्त खाद नहीं मिली, तो पैदावार पर असर पड़ेगा और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
फिरोजाबाद के जिलाधिकारी रमेश रंजन ने कहा है कि जिले में खाद की कोई वास्तविक कमी नहीं है और वितरण पूरी तरह से केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ किसान आवश्यकता से अधिक खाद मांग रहे हैं, जो फिलहाल संभव नहीं है। प्रशासन किसानों को मिट्टी की जांच कराने और वैज्ञानिक तरीके से उर्वरक के उपयोग की सलाह दे रहा है।
इस मुद्दे पर अब राजनीति भी गर्माने लगी है। आम आदमी पार्टी की फिरोजाबाद इकाई ने खाद की कमी को लेकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि अन्नदाता आज अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।
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