Shubhanshu Shukla’s Homecoming: भारतीय वायुसेना (IAF) के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की घर वापसी लखनऊवासियों के लिए गर्व और उत्साह का ऐतिहासिक पल साबित हुई। डेढ़ साल बाद जब वह सोमवार सुबह अपने शहर पहुंचे, तो एयरपोर्ट से लेकर स्कूल तक हर जगह उनका शानदार स्वागत किया गया। देश के दूसरे अंतरिक्ष यात्री के रूप में उन्होंने न केवल भारत का मान बढ़ाया, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा की एक नई कहानी भी रची।
अंतरिक्ष की ऐतिहासिक यात्रा
शुभांशु शुक्ला ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचकर इतिहास रचा। राकेश शर्मा के बाद वह पहले भारतीय बने जिन्होंने Axiom-4 मिशन के तहत ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष की उड़ान भरी। 25 जून को अमेरिका के केनेडी स्पेस सेंटर से उनकी यात्रा शुरू हुई और 15 जुलाई को वह सुरक्षित धरती पर लौट आए। उनकी इस यात्रा ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की संभावनाओं को नई दिशा दी है।
लखनऊ में जोरदार स्वागत
लखनऊ एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किसी उत्सव से कम नहीं था। परिवार, रिश्तेदार, बच्चे और प्रशंसक फूलों और तालियों के साथ उनका इंतजार कर रहे थे। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने स्वयं एयरपोर्ट पर पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा, “आज लखनऊ के लिए गर्व का दिन है। भारत का बेटा, लखनऊ का बेटा, अंतरिक्ष यात्रा के बाद अपने शहर की धरती पर लौट रहा है। यह पल हम सभी के लिए ऐतिहासिक है।”
शुभांशु की मां ने बेटे की घर वापसी को अपने जीवन का सबसे अनमोल और भावनात्मक क्षण बताया, वहीं उनकी बहन ने कहा कि यह उपलब्धि केवल हमारे परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए सम्मान और गर्व की बात है।
बच्चों से मुलाकात ने मिटाई थकान
लखनऊ पहुंचने के बाद शुभांशु सीधे अपने पुराने स्कूल, सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर पहुंचे। यहां छात्रों ने उनका जोश और उत्साह से स्वागत किया।
भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “सुबह मैं काफी थका हुआ था, लेकिन जब बच्चों को सड़क पर खड़ा देखा, वह भी सुबह से… तो मेरी सारी थकान दूर हो गई।” उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी है दृढ़ संकल्प।
2040 तक चाँद पर भारत का लक्ष्य
अपने संबोधन में उन्होंने भारत के अंतरिक्ष भविष्य पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “आज के बच्चे केवल यह नहीं पूछते कि अंतरिक्ष स्टेशन में कैसा लगता है, बल्कि वे जानना चाहते हैं कि अंतरिक्ष यात्री कैसे बनते हैं। यह बताता है कि उनकी सोच कितनी आगे है। हमारा लक्ष्य है 2040 तक चाँद पर उतरना, और यह अब कोई दूर का सपना नहीं रहा।”
उन्होंने Axiom-4 मिशन के दौरान अपने अनुभव भी साझा किए। “लॉन्च के वक्त ऐसा लगा जैसे शरीर की हर हड्डी हिल रही हो। कुछ ही मिनटों में रफ्तार 0 से 28,500 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है। यह अनुभव जीवनभर याद रहेगा।”
आगे की योजनाएं
शुभांशु शुक्ला अब देशभर में छात्रों से मुलाकात कर उन्हें विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान की ओर प्रेरित करेंगे। लखनऊ में आयोजित सम्मान समारोह में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य बच्चों के सपनों को नई उड़ान देना है।
शुभांशु शुक्ला की यह ऐतिहासिक उपलब्धि केवल एक अंतरिक्ष यात्रा भर नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य की वैज्ञानिक प्रगति की ओर बढ़ता हुआ कदम है। उनका यह संदेश,“दृढ़ निश्चय ही सफलता की कुंजी है”,आज के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देता है। उनकी घर वापसी ने लखनऊ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत को गर्व से भर दिया है।
हमारी इंटर्न सुनिधि सिंह द्वारा लिखित
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